Wednesday, 22 March 2017

राम मंदिर पर क्यों आसान नहीं है समझौता?

रामजन्म भूमि और बाबरी मस्जिद विवाद को आपसी सहमति से अदालत के बाहर सुलझाने की सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के पीछे कई वजहें हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये धर्म और आस्था से जुड़ा मामला है और संवेदनशील मसलों का हल आपसी बातचीत से हो. लेकिन ये इतना आसान नहीं है.
हिन्दू-मुसलमानों के तर्क
पहली बात है कि ये किसी का व्यक्तिगत मुकदमा नहीं है. इसमें मुसलमानों की तरफ से शिया और सुन्नी सब शामिल हैं और हिन्दुओं की तरफ से भी सब संप्रदाय शामिल हैं. तो इसमें कोई एक व्यक्ति या एक संस्था समझौता नहीं कर सकती.
दूसरी बात ये कि हिन्दुओं की तरफ़ से तर्क ये है कि रामजन्म भूमि को देवत्व प्राप्त है, वहां राम मंदिर हो न हो मूर्ती हो न हो वो जगह ही पूज्य है.
वो जगह हट नहीं सकती.
हालांकि कुछ लोग ये तर्क देते हैं कि कुछ मुस्लिम देशों में निर्माण कार्य के लिए मस्जिदें हटाई गईं हैं और दूसर जगह ले जाई गई हैं.
वहीं हिन्दुस्तान के मुसलमानों का कहना है कि मस्जिद जहां एक बार बन गई तो वो क़यामत तक रहेगी, वो अल्लाह की संपत्ति है, वो किसी को दे नहीं सकते . इसलिए मुस्लिम समुदाय की तरफ से ये कहा जा रहा है कि अगर इस मामले में सुप्रीम कोर्ट फ़ैसला कर दे तो हमें कोई ऐतराज़ नहीं हैं.

पहले भी हो चुकी हैं समझौते की कोशिशें
इस मामले में समझौते की कई मुश्किलें हैं क्योंकि पहले भी इसकी कोशिशें हुई हैं, दो बार प्रधानमंत्री स्तर पर प्रयास हुए.
इसके अलावा विश्व हिन्दू परिषद और अली मियां जो मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के रहनुमा थे उनके बीच में कोशिश हुई हैं. लेकिन इस मसले में बीच का रास्ते नहीं निकल पाया तो समझौता नहीं हुआ.

अदालत क्यों नहीं कर रही फ़ैसला
अब सवाल ये है कि अदालत इस मसले का फैसला क्यों नहीं कर पा रही है?
दरअसल अदालत के लिए फैसले में सबसे बड़ी दिक्कत है मामले की सुनवाई करना. सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या कम है. ये संभव नहीं है हाई कोर्ट की तरह तीन जजों की एक बेंच सुप्रीम कोर्ट में भी मामले की सुनवाई करे.
हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान कई टन सबूत और काग़ज़ात पेश हुए. कोई हिन्दी में है, कोई उर्दू में है कोई फ़ारसी में है. इन काग़जों को सुप्रीम कोर्ट में पेश करने के लिए ज़रूरी है कि इनका अंग्रेज़ी में अनुवाद किया जाए. अभी तक सारे काग़ज़ात ही सुप्रीम कोर्ट में पेश नहीं हो पाए हैं और सबका अनुवाद का काम पूरा नहीं हुआ है.

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में दूसरी समस्या ये भी है कि मुकदमें के पक्षकार बहुत हैं. ऐसे में सुनवाई में कई हफ़्तों का समय लगेगा.
अगर रोज़ाना सुनवाई करें तो कई बार जज रिटायर हो जाते हैं और नए जज आ जाते हैं. तो सुनवाई पूरी नहीं हो पाएगी. इसीलिए चीफ जस्टिस ने कोर्ट ने बाहर समझौता करने की सलाह दी है. ये भी हो सकता है कि चीफ जस्टिस के दिमाग़ में ये बात रही हो कि अगर कोर्ट कोई फ़ैसला कर भी दे तो समाज शायद उसे आसानी से स्वीकार ना करे.
राम जन्मभूमि का मामला पहले एक स्थानीय विवाद था और स्थानीय अदालत में मुक़दमा चल रहा था. लेकिन जब विश्व हिन्दू परिषद इसमें कूदी तो उसके बाद बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी का गठन हुआ और ये विश्व हिन्दू परिषद , भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के एक हिन्दू राष्ट्र के सपने का हिस्सा हो गया.
ऐसे में मुस्लमानों को ये भी लगता है कि ये एक मस्जिद का मसला नहीं है, अगर हम सरेंडर कर दें तो कहीं ऐसा ना हो कि इसके आड़ में उनके धर्म और संस्कृति को ख़तरा हो जाए.
(ये लेखक के निजी विचार हैं)

Friday, 19 August 2016

IPO क्या है और इसमें कैसे करें निवेश ?


शेयर बाजार और निवेश से जुड़े तमाम ऐसे पहलू हैं जिनसे ज्यादातर लोग अनजान हैं। अधिकतर लोग सामान्य बैंकिंग और बीमा के बारे में अच्छी जानकारी रखते हैं लेकिन निवेश के संबंध में ज्यादा जानकारी नहीं होती है। मसलन शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, बान्ड्स, आईपीओ आदि ऐसे शब्द हैं जिनके बारे में हम सुनते जरूर हैं लेकिन ज्यादा जानकारी नहीं रखते हैं।
इन्ही में से एक है टर्म है आईपीओ। क्या है आईपीओ, ये कैसे काम करता है, इसमें निवेश की क्या संभावनाए हैं, ऐसे सभी सवाल जो आपके मन में आईपीओ को लेकर हैं उसका यहां समाधान होगा और आईपीओ के बारे में आसानी से समझेंगे भी।

क्या है IPO ?
जब एक कंपनी अपने समान्य स्टॉक या शेयर को पहली बार जनता के लिए जारी करता है तो उसे आईपीओ, इनीशियल पब्लिक ऑफरिंग (सार्वजनिक प्रस्ताव) कहते हैं। लिमिटेड कंपनियों द्वारा ये आईपीओ इसलिए जारी किया जाता है जिससे वह शेयर बाजार में सूचीबद्ध हो सके। शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद कंपनी के शेयरों की खरीद शेयर बाजार में हो सकेगी।

IPO लाने का कारण
जब किसी कंपनी को अतिरिक्त पूंजी की आवश्यकता होती है तो वह आईपीओ जारी करती है। ये आईपीओ कंपनी उस वक्त भी जारी कर सकती है जब उसके पास धन की कमी हो वह बाजार से कर्ज लेने के बजाय आईपीओ से पैसा जुटाना ज्यादा बेहतर समझती है। यह किसी भी कंपनी की विस्तार योजना होती है। शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद कंपनी अपने शेयरों को अन्य योजनाओं में लगा सकती है।

IPO पर सेबी की राय
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानि SEBI (Securities and Exchange Board of India) आईपीओ लाने वाली कंपनियो के लिए एक सरकारी रेग्युलेटरी है। यह आईपीओ लाने वाली कंपनियो से नियमों का सख्ती से पालन करवाती है। कंपनी हर तरह की जानकारी सेबी को देने के लिए बाध्य होती हैं। यह एक तरह की अनिवार्य शर्त है कि कंपनी अपनी सारी जानकारी सेबी को देगी। यही नहीं, आईपीओ लाने के बाद सेबी कंपनी की जांच भी करवाती है, कि आखिर उसके द्वारा दी गई जानकारी सही है या नहीं।

IPO में निवेश
वैसे तो आईपीओ को एक जोखिम भरा निवेश माना गया है, क्योंकि इसमें कंपनी की शेयरों के प्रगति के संबंध में कोई आंकड़े या जानकारी लोगों के पास नहीं होती है, फिर भी जो व्यक्ति पहली बार शेयर बाजार में निवेश करता है उसके लिए आईपीओ एक बेहतर विकल्प है। अगर आपको शेयर बाजार में भविष्य बनाना है तो आपको आईपीओ की जानकारी होनी ही चाहिए।

IPO से लाभ
आईपीओ में निवेशक तरफ से लगाई गई पूंजी सीधे कंपनी के पास जाती है। हालांकि विनिवेश के मामले में आईपीओ से जो पूंजी मिलती है वह सीधे सरकार के पास जाती है। यदि एक बार इनके शेयरों की ट्रेडिंग की इजाजत मिल जाए तो फिर इन्हें खरीदा और बेचा जा सकता है, हां एक बात जरूर याद रखें शेयर को खरीदने और बेचने से होने वाले लाभ और हानि की जिम्मेदारी निवेशक की होगी।

IPO में कैसे करें निवेश
जब भी आप आईपीओ खरीदने के लिए किसी कंपनी का चयन करते हैं तो सबसे पहले आपका ब्रोकर बेस्ट होना चाहिए। कोशिश करें कि ब्रोकर के साथ मिलकर कंपनी का चयन करें। जो कंपनीं चुन रहे हैं उससे तीन-चार अन्य कंपनियों की भी तुलना करें। कुछ दिन तक इन सभी कंपनियों की प्रगति को देखने के बाद ही निवेश करें। रेटिंग एजेंसी की राय भी बहुत मायने रखती है। कंपनी के आईपीओ की कीमत भी देखें, बाजार में कंपनी के प्रमोटर की साख देखें और दूसरे निवेशकों से कंपनी के आईपीओ को लेकर जानकारी लेते रहें। 

सतर्क रहें
कई बार लोगो के पास आईपीओ कि पूरी जानकारी नही होती है जिस वजह से उन्हें बहुत बार बड़ी हानि हो जाती है. हमेशा सतर्क रहे, कई बार पुराने निवेशक आईपीओ के जरिए अपने शेयर बेचते हैं, और कुछ मामलों में पुराने निवेशकों के शेयर के साथ-साथ नए शेयर भी पेश करते हैं। आईपीओ निवेशक को पुराने निवेशकों के शेयर बेचने के कारणों को जानना चाहिए। अगर आप चाहते हैं कि आप यह कारोबार अच्छे से आगे बढ़े और आपको हमेशा लाभ हो तो इस क्षेत्र में आगे बढ़ने से पहले हर छोटी से छोटी बात पर ध्यान अवश्य दें।